Friday, August 27, 2010

Indian Peacock

About
The male Indian Peacock known as the peacock, the peacock is one of the much familiar birds on the earth. These large, golden brightly colored birds have a unique crest and an unique attractive train. The train (140 to 160 centimeters in length) accounts for more than 60% of their total body length (230 centimeters). Combined with a large wingspan (140 to 160 centimeters), this train makes the male peacock one of the largest flying birds in the world. The train is formed by 100-150 highly specialized upper tail-coverts. Each of these feathers sports an ornamental ocellus, or eye-spot, and has long disintegrated points, giving the feathers a loose, fluffy appearance. When displaying to a female, the peacock erects this train into a spectacular fan, displaying the ocelli to their best advantage. 

The more subtly colored female Peacock is mostly brown above with a white belly. Her decoration is limited to a prominent crest and green neck feathers. Though females (3.00 kg to 4.5 kg) weigh nearly as much as the males (4.0 kg -6.0 kg), they rarely exceed 100 centimeter in total body length.
The peacock is mostly found in the Indian sub-continent from the south and east of the Indus River, east Assam, Jammu and Kashmir, south Mizoram and the whole of the Indian peninsula. The peacock enjoys immense protection.

Distribution and Home
the Indian Peacock occurs from some places in eastern Pakistan through India, south from the Himalayas to Sri Lanka and Bangladesh, it may now be extinct in that country. Its highly ornamental appearance motivated early seafarers to transplant the peacock to their homelands in other parts of the western world. Phoenician traders in the time of King Solomon (1000 B.C.) introduced the birds to present-day Syria and the Egyptian Pharaohs.
In its native India, the peacock is a creature of the open jungles and riparian underbrush. In southern India, it also prefers stream-side forests but may also be found in orchards and other cultivated areas

Diet
Indian Peacock does most of their foraging in the early morning and shortly before sunset. They retreat to the shade and security of the forest for the hottest portion of the day. Foods include insects, grains, small mammals, small reptiles, drupes, berries, wild figs, and some cultivated crops.

Conservation and History of Relationship with Man
The great beauty and popularity of the Indian Peacock has guaranteed its protection throughout most of its native and introduced ranges. It is the national bird of India. The peacock is prominent in the mythology and folklore of the Indian people. The Hindus consider the bird to be sacred because the god Kartikeya (son of the Lord Shiva and Parvati and brother to the god Ganesh) rides on its back. Legends hold that the peacock can charm snakes and addle their eggs.

Greek mythology describes how the peacock acquired the many eyes in his ornamental train. The goddess Hera had a beautiful priestess named Io. Io was greatly admired by Zeus. To protect her from Hera’s jealousy Zeus transformed Io into a heifer. Hera tricked Zeus into giving the heifer to her as a gift and set her faithful servant Argus to watch over her. Argus had numerous eyes all over his body, making him a natural choice for the assignment. Zeus sent the god Hermes to free Io from Hera’s watchman. Hermes charmed Argus to sleep until all of his eyes were closed and then killed him. To honor her faithful watchman, Hera took Argus’ eyes and placed them on the tail of the peacock.

This long and close association with humans has proven the peafowl’s adaptability to human-altered landscapes. This species does not appear to need any additional legal protection or conservation attention
 

Saturday, June 26, 2010

10 Unforgettable Commandments for Success in Life

1. Live a simple and ordinary manner of life.
2. Not live for eat, eat for live.
3. Stand no envy. Commit no insult. Speak no lies. Practice no dishonesty. Harbor no spite. You will be ever enjoying, joyful and diplomatic.
4. Justice is the rule of life. Lead a honorable life. Strictly hold fast to Dharma. Human life is not human without merits. Study the lives of saints and draw encouragement from them.
5. Grow a melting heart, the giving hand, the nicely words, the life of tune, equal dream, and impartial manner. Your life will, really, be holy.
6. Lead a keeping up life. Take grip of each day as if it were the last day, and use every second in appeal, thought and repair. Let your life become a nonstop let go to God.
7. Live in the present. Forget the past. Give up hopes of the future.
8. Appreciate healthy the import of life, and then start the mission.
9. Life is thy supreme gift. use each second gainfully.
10. Victory often comes to those who defy and take action it rarely comes to the coy.

Friday, May 28, 2010

परख तो लूं तेरा प्यार





जब राधा और कृष्ण साथ रह सकते हैं, तो कोई मनुष्य क्यों नहीं? आपको भले ही तर्क अजीब लगे परंतु देश के सर्वोच्च न्यायालय की लिव इन रिलेशनशिप की नैतिकता को लेकर यही टिप्पणी थी। हालांकि सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि क्या शीर्ष न्यायालय की यह टिप्पणी बिना शादी के साथ रहने के चलन के साथ जुड़ी सामाजिक अस्वीकृति को समाप्त कर पाएगी।

[जियो और जीने दो]
आयुष और साक्षी जैसे बहुत सारे लोगों के लिए एक साथ रहना बहुत सुविधाजनक व्यवस्था है। इसी तरह बचपन के दोस्त सॉफ्टवेयर इंजीनियर सुमित श्रीवास्तव और मीडिया प्रोफेशनल स्मिता पांडे को नौकरी के लिए दिल्ली जाना पड़ा, जहां इन दोनों ने साथ रहने का निर्णय लिया। यह फैसला हमनें जल्दबाजी में नहीं खूब सोच-समझकर लिया है। चार साल से इस रिश्ते को निभाने वाली स्मिता कहती हैं कि किसी भी रोमांटिक रिश्ते में आप कभी भी अपने पार्टनर को पूरी तरह से समझ नहीं पाते है। मैंने अपने कई दोस्तों को प्रेम विवाह करने के बाद भी अलग होते देखा है। लिव इन रिलेशनशिप में आप अपने पार्टनर के गुणों और कमियों के बारे में बाखूबी जान लेते हैं। इस रिश्ते में शादी की अपेक्षा कम दबाव होता है और अगर दोनों में न निभे, तो रास्ते अलग किए जा सकते है। स्मिता के अनुसार इस तरह से एक साथ रहना जोड़े को अधिक जिम्मेदार बना देता है। सप्ताहांत का प्रयोग मिलकर घर के कामों को निबटाने के लिए होता है।
वह हँसते हुए कहती है, साफ-सफाई, खाना बनाना और लांड्री जैसे सभी काम हम दोनों मिल कर करते है। सुमित बहुत अधिक जिम्मेदार हो गया है। मुझे नहीं लगता था कि वह इतना अधिक बदल जाएगा। उनका मानना है कि कानूनी सहयोग से इस तरह के रिश्तों को देर से ही सही सामाजिक स्वीकार्यता मिल जाएगी। सुमित कहते है, अभी लोग हमारे साथ ऐसा व्यवहार करते हैं, जैसे हम कोई असामाजिक तत्व हों। कई बार तो वे हमें देखकर दबी हँसी हँसते है।

[मकान मालिक से जंग]
आईआईटी से पढ़ाई और मोटे वेतन के बावजूद भी निशा मेनन और अमित कपूर के लिए ही किराए के मकान की तलाश आसान नहीं थी। आईआईटी खड़गपुर में पढ़ाई के दौरान चल रहे लंबे अफेयर के बाद निशा और अमित साथ रहने के लिए दिल्ली आ गए। निशा कहती है, हमने शादीशुदा होने का झूठ बोला। इसके अतिरिक्त किसी रिश्तेदार के आने पर भी हम दोनों को काफी जुगत लगानी पड़ती थी। अमित कहते है, जितनी भी बार भी निशा के अभिभावक दिल्ली आए मुझे अपना सामान पैक करके ऑफिस में सोना पड़ा। हाल ही में मेरे चचेरे भाई की शादी के दौरान मेरे सभी रिश्तेदार जानना चाहते थे कि मैं कहां रहता हूं? बड़ी मुश्किल से मैंने उनके सवालों को टाला।
एमएनसी में कंसलटेट अमित और प्रोडक्शन कंपनी की क्रिएटिव हेड निशा दो साल से साथ रह रहे है। जल्द ही निशा के साथ शादी के बंधन में बँधने जा रहे अमित मानते है कि लिव इन अनुकूलता को परखने का सबसे अच्छा माध्यम है।

[बदलाव की बयार]
क्या हम आने वाले समय में कुछ और जोड़ों को लिव इन रिलेशनशिप में देखने जा रहे है? बहुत सारे समाज विज्ञानी और मनोविज्ञानी कहते है कि आर्थिक स्वतंत्रता और पश्चिमी जीवनशैली के प्रभाव के चलते इस तरह के जोड़ों की संख्या लगातार बढ़ रही है। समाजविज्ञानी शिव विश्वनाथन कहते है, भले ही समाज में कोई क्रांतिकारी परिवर्तन न आया हो, परंतु समाज का नजरिया कुछ हद तक बदला है। कानूनी स्वीकार्यता मिलने से भी ऐसे जोड़ों की संख्या बढ़ेगी। मनोविज्ञानी और लाइफस्टाइल विशेषज्ञ डॉ. रचना सिंह कहती है, इन दिनों बहुत सारे युवा लिव इन रिलेशनशिप का विकल्प चुन रहे है। मुझे लगता है कि महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके अतिरिक्त लोगों की सोच में भी बदलाव आया है। अधिकतर जोड़े लिव इन का चुनाव सुविधाजनक होने के कारण करते है। दूसरा शादी के पहले एक साथ रहकर देख लेना चाहते हैं कि वे एक-दूसरे के लिए बने हैं या नहीं। वह यह भी जोड़ती है कि सलाम नमस्ते और वेकअप सिड जैसी फिल्मों ने भी लिव इन रिलेशनशिप का बिल्कुल ताजा रूप सामने रखा है।
डॉ. रचना इसके नुकसानदायक पक्ष के बारे में जोड़ना नहीं भूलतीं है। उनके अनुसार कभी-कभी समर्पण की कमी के चलते इस रिश्ते को शादी की तरह चलाने के लिए कड़े प्रयास नहीं किए जाते है। यही कारण है कि बहुत छोटी-छोटी बातें भी ब्रेकअप का कारण बन जाती है। जबकि शादी में तलाक लेना आसान नहीं होता है। यद्यपि एक प्रोडक्शन हाउस के असिसटेट डायरेक्टर गौरव और पब्लिक रिलेशन प्रोफेशनल मीनाक्षी सिंह इस बात से सहमत नहीं है। गौरव कहते है, मुझे लगता है कि शादी की तरह ही इस रिश्ते में समर्पण होता है। हम घर के खर्र्चो के साथ ही काम भी मिल-बांटकर करते है।

[आर्डर-आर्डर]
कुछ समय पहले अभिनेत्री खुशबू द्वारा विवाहपूर्व सेक्स को लेकर की गई विवादास्पद टिप्पणी के पक्ष में उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि वयस्कों के बीच इस तरह के संबंधों में कुछ भी अवैध नहीं है, परंतु क्या कानूनी स्वीकार्यता जमीनी हकीकत को बदल देगी। अभिनेत्री खुशबू की सलाहकार पिंकी कहती है, सभ्य समाज इस टिप्पणी पर गौर जरूर करेगा। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता कामिनी जायसवाल कहती हैं, समाज में जागरूकता आए बिना किसी भी कानून का कोई फायदा नहीं है। वह कहती है, कानून से कोई फर्क नहीं पड़ता है। लोगों की सोच को बदलने की आवश्यकता है। वह कहती है, घरेलू हिंसा कानून के अंतर्गत लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला को भी रिश्ता टूटने पर मुआवजा मिल सकता है।
हालांकि छह साल तक लिव इन में रहने के बाद अपने पार्टनर अमित मेहरा के साथ शादी करने वाली सेमंती सिन्हा रे तर्क देती है, मुझे समझ में नहीं आता कि किसी वयस्क व्यक्ति को दूसरे के साथ रहने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है, जबकि वे समाज को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं कर रहे हैं। एक साथ रहने का मतलब हर रात ड्रिंक या व्यभिचार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के निरीक्षण में सामने आया है लिव इन में रह रहे जोड़े की अपेक्षा शादीशुदा जोड़ों में अधिक समस्या आती है।
पिछले तेरह सालों से लिव इन में रह रहीं संध्या गोखले मानती है कि कानूनी बाध्यता से महिलाओं का शोषण रोकने में काफी सहायता मिलेगी। मुंबई में रहने वाली सॉफ्टवेयर कंसलटेट संध्या कहती है, इससे उन्हें संपत्तिके साथ ही गुजारे भत्तो का अधिकार मिलेगा। इसे आप इस तरह से भी ले सकते है कि मौजूदा विवाह व्यवस्था महिलाओं के लिए अधिक उपयुक्त नहीं है।

[सिम्पली दिल दा मामला है]
आयुष मल्होत्रा और साक्षी कपूर की प्रेम-कहानी बिल्कुल किसी बॉलीवुड रोमांस की तरह है। इसकी शुरुआत कॉलेज में रैगिंग सेशन से हुई जहां आयुष साक्षी के सीनियर थे। कॉलेज के टर्म गुजरने के साथ ही उनका रिश्ता गहराता चला गया। डिग्री लेते-लेते वे पूरी तरह से करीब आ चुके थे।
कॅरियर उन्हे गुड़गांव ले आया जहां दोनों ने लिव इन रिलेशनशिप में रहने का फैसला लिया। गुड़गांव में आयुष का एक अपार्टमेंट है इसलिए दोनों को घर खोजने के कटु अनुभवों का सामना नहीं करना पड़ा। यह जोड़ा एक मामले में और भाग्यशाली था। कारण, उनके परिवार वालों ने उन्हें अपने ढंग से जीने की आजादी दे रखी थी। जहां तक कानूनी स्वीकार्यता की बात है दोनों ने कभी इस बात की चिंता ही नहीं की। वे कहते है कि दो लोगों का एक साथ रहना नितांत निजी मामला है इसके लिए किसी कानूनी स्वीकार्यता की आवश्यकता नहीं है।
कंस्ट्रक्शन का बिजनेस करने वाले आयुष कहते है, साथ रहने के लिए आपसी समझ और अनुकूलता सबसे महत्वपूर्ण है। हालांकि काल सेंटर में एक्जीक्यूटिव साक्षी के अनियमित काम के घंटों के कारण दोनों केवल सप्ताहांत में ही एक दूसरे के लिए समय निकाल पाते है। आयुष हंसते हुए कहते है, हम दोनों लंबा समय ऑफिस में बिताते हैं, खूब खाते है और महीने के अंत तक बिल्कुल कंगाल भी हो जाते है।
शादी के बारे में अभी इन्होंने चर्चा भी नहीं की है। इसके बावजूद दोनों समाज के व्यवहार से बिल्कुल बेखबर भी नहीं है। मल्होत्रा कहते है, लोगों की धारणा है कि लिव इन में रहने वाले लोग केवल मस्ती के लिए एक साथ रहते है। इसे दो लोगों द्वारा समाज के सख्त रवैए और झूठी नैतिकता के विरुद्घ आपसी सहमति से उठाए गए कदम के रूप में लेना चाहिए।

[उलझते मुद्दे]
क्या सभी लिव इन रिलेशनशिप की परिणति शादी ही होती है? डॉ. रचना कहती है, इन रिश्तों में जी रहे लोगों के दिमाग में तो ये रहता है, पर रिश्ता टूटने असर महिलाओं पर अधिक पड़ता है। पति के साथ एंप एंजल्स नामक प्रोडक्शन कंपनी चला रही सेमंती कहती है, शुरुआती मुलाकातों में ही हमें महसूस हो गया था कि हम एक-दूसरे के लिए ही बने है। छह साल तक हम साथ रहे। हमारे अभिभावकों ने सलाह दी कि जब हम स्थाई रिश्ते में हैं, तो हमें होने वाले बच्चों की खातिर शादी कर लेनी चाहिए, इसलिए हमने शादी कर ली। इससे हमारे जीवन में कोई ज्यादा बदलाव नहीं आया बस हमें एक माता-पिता और मिल गए।
कुछ जोड़े अभिभावकों के दबाव में शादी करते है, तो कुछ सामाजिक स्वीकार्यता पाने के लिए। इसके बावजूद बहुत सारे जोड़े शादी की संस्था के खिलाफ जाकर लिव इन में ही रहना पसंद करते है। संध्या और उनके मानवाधिकार अधिवक्ता पार्टनर मिहिर देसाई ने 13 साल तक लिव इन में रहने के बावजूद शादी की कोई योजना नहीं बनाई है। वह कहती है, मैं विवाह संस्था के खिलाफ हूं। यह बराबरी पर आधारित नहीं होती है। शादी में महिलाओं को बलिदान करने वाली भूमिका निभानी पड़ती है। अधिकतर लिव इन के रिश्तों के शादी में बदलने का कारण समाज से टकराव के बजाय सामाजिक रूप से आसान जिंदगी पाना है।

[माइनस प्वांइट]
* लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या घर खोजने में आती है। उन्हें अपने रिश्ते के बारे में झूठ बोलना पड़ता है। कई मकान मालिक भी अब चालाकी दिखाते हुए मैरिज सर्टिफिकेट दिखाने की मांग करने लगे है।
* अपने लिए रहने की एक वैकल्पिक व्यवस्था भी करनी पड़ती है। कारण, अक्सर रिश्तेदारों के आने का खतरा भी रहता है।
* टिप्पणियों और आपको देखकर दबी हँसी हँसने वाले चेहरे देखने के लिए तैयार रहे।

Tuesday, May 11, 2010

माँ तो बस माँ है


लबोँ पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती
बस एक माँ है जो मुझसे खफा नहीं होती॥
तमाम उम्र सलामत रहे दुआ है मेरी
हमारे सिर पे हैं जो हाथ बरकतोँ वाले।

माँ के आगे यूँ कभी खुलकर नहीं रोना
जहाँ बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती।

मुझे भी उसकी जुदाई सताती रहती है
उसे भी ख्वाब में बेटा दिखाई देता है।

ऐ अँधेरे! देख ले, मुँह तेरा काला हो गया
मां ने आँखें खोल दीं, घर में उजाला हो गया।

इस तरह मेरे गुनाहोँ को वो धो देती है
माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।

घेर लेने को मुझे जब भी बलाएँ आ गईं
ढाल बनकर सामने माँ की दुआएँ आ गईं।

मेरी ख्वाहिश है कि फिर से फरिश्ता हो जाऊँ
मां से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ।

माँ तुम्हारे जाने के बाद
आता नहीं याद,
मैं कितना रोया, किसकी गोद सोया,
नखरे छूटे, जिद भी भूला,
टूटा पालना, फिर न झूला।
मेरे शिल्पी ने लौदा छोड़ा,
वक्त ने उसको जीभर तोड़ा

तुम होती, तो जाने क्या होता
हाँ ये तस्वीर रंगीन होती
और जिंदगी भी।
है न???

अश्क अर्जी लगते हैं
कि ये लम्हे मुसलसल हों
कि बच्चे जब खुलकर हँसते हैं
तो माँओं की आँखें भीग जाती हैं॥
मेरी कोशिश जिसे मुश्किल समझ के छोड़ देती है
माँ की सोच उसे सुलझाने वहाँ तक दौड़ जाती है
गजब का हुनर है कि पढ़कर मेरा चेहरा
लफ्ज़-दर-लफ्ज़ माँ सबका सब बोल जाती है॥
यकीनन तो कभी सख्त पिता की तरह लगती है
तभी तो माँ की डाँट दुआ की तरह लगती है
खुदा में बस थोड़ा अहसास माँ सरीखा है
ऐसा नहीं कि माँ खुदा की तरह लगती है॥

दुनिया में बस एक ही खूबसूरत बच्चा है। और वह हर माँ के पास है।

बच्चे के साथ ही जन्म लेती है माँ। पहले वह थी ही कहाँ? वह तो स्त्री ही थी। माँ का दर्जा तो उसे बच्चे से ही मिलता है।

Friday, April 30, 2010

Socho koi pagli thi ........


Socho koi pagli thi
Albeli, anjaani deewaanisi…
Ek pagli thi aur uski ek kahaani thi
Paglapan hi jisse kho diya usne
Ek aisi roti hui si kahaani thi
Barish ki us raat ki kahaani thi
Jahan barish na sirf aasmaani thi
Ek pagli aur uske toote dil ki
Ek roti hui si kahaani thi
Ek zindagi si kahaani thi
Bahut kuch paakar kho diya
Ek jaani hui phir bhi anjaani kahaani thi
Haan yeh pagli ki uske khoye hue paglepan ki
Ek roti hui si kahaani thi
Apne aaj ko badalti hui
Phir bhi ateet ki kahaani thi
Kuch reh gayaa hain adhoora shaayad
Ek chubhti hui kahaani thi
Kuch dhoond rahi yeh pagli aaj bhi
Shaayad… kuch khoti hui kahaani thi
Kuch dard aaj bhi hain mehsoos karti
Poorani lekin phir bhi aajsi kahaani thi
Socho ek pagli thi
Aur uski ek yehi kahaani thi
Na socha na jaana
Bas ek ehsaas ko le
Kise sab kuch de diya
Haan ek aise paglepan ki
Ek deewani si kahaani thi
Dil ki dil ke jazbaaton ki
Dil ke ehsaason ki kahaani thi
Kisi ko dil na dena apna
Yeh kehti hui
Dil dekar paaya toota hua
Ek tootese se dil ki kahaani thi
Muskan ki Muskaraahat ki
Inki khoti hui kahaani thi
Dil mein jo yekin tha sabpar
Unki khoti hui kahaani thi
Kuch pyar tha kuch dosti thi
Jaane anjaane
Apne begaano ke liye
Inke kho jaane ki kahaani thi
Khud par jo bharosa tha
Uske kho jaane ki kahaani thi
Socho ek pagli thi
Haan uski yehi kahaani thi
Paakar hain ab itna kuch gavaayaa
Kuch pane se darrti hui
Khud ko khoti hui kahaani thi
Socho ek pagli thi
Uski na pagli si ek kahaani thi…..

Sunday, March 28, 2010

वक़्त नहीं कटता

घडी कोई दूकान हो, जहा वक़्त बिकता हो,
तो बीतने वाले पल खरीद लाओ,
घडी कोई मकान हो, जहा वक़्त क़ैद हो,
तो सारे खिड़की दरवाज़े खोल आओ,

घडी कोई रास्ता हो, जहा वक़्त चल न पाए,
तो ज़रा सहारा दो उसे,
घडी कोई रेल हो, जिसपर वक़्त चढ़ना न चाहे,
तो जबरन लाद दो उसे,

घडी गर गिल्ली मिटटी हो, जिसमें वक़्त छुपा हो,
तो आकार दो उसे,
घडी कोई वजह हो, जिसकी आड़ में वक़्त अलसाए,
तो नकार दो उसे,

तुम्हारा मेरे पास न होना तुम्हारी मजबूरी होगी,
पर तुम कुछ तो करो जिस से के मेरा वक़्त कटे|

Posted by Narendra Jangir

“वक़्त नहींब है"

मोबाइल में दोस्तों के नाम जमा किये जा रहे है
याद कभी कर पाते नहीं
जब भूला बिसरा कोई दोस्त मिलता है
तो बहाना मारते है
“वक़्त नहीं है”

रिश्तों पर रिश्तें बनाए ही चले जा रहे है
प्यार उसमें कुछ पनपते नहीं
जब माँ बालों पर उंगलिया फेरती है
तो खीजकर कहते है
“वक़्त नहींब है”

बैंक बैलेंस दिनों दिन बङते जा रहे है
खर्च करने का मौक़ा मिलता नहीं
जब ज़रुरतमंद कुछ पैसा मांगता है तब
मुह बनाकर कहते है
“वक़्त नहीं है”

सरकार पर दोष लगाए जा रहे हैं
हमें कोई सुविधा मिलती नहीं
जब वोट डालने की बारी आती है
बिना नज़रें मिलाए कहते है
“वक़्त नहीं है”

आख़िर ये ‘वक़्त’ होता किसलिए है
इसे जीकर याद बनाते क्यूँ नहीं
फिर जब अन्तिम समय आता है
आँखों में आसू लिए पछताकर कहते है
“वक़्त नहीं है”


Posted by Narendra Jangir

" वक़्त नहीं "

हर ख़ुशी है लोगों के दामन में,
पर एक हंसी के लिए वक़्त नहीं ...
दिन रात दौड़ती दुनिया में,
ज़िन्दगी के लिए ही वक़्त नहीं .

माँ की लोरी का एहसास तो है,
पर माँ को माँ कहने का वक़्त नहीं.
सारे रिश्तों को तो हम मार चुके,
अब उन्हें दफ़नाने का भी वक़्त नहीं.

सारे नाम मोबाइल में हैं,
पर दोस्ती के लिए वक़्त नहीं.
गैरों की क्या बात करें,
जब अपनों के लिए ही वक़्त नहीं.
आँखों में है नींद भरी,
पर सोने का वक़्त नहीं.
दिल है ग़मों से भरा हुआ,
पर रोने का भी वक़्त नहीं.



पैसों की दौड़ में ऐसे दौड़े,
कि थकने का भी वक़्त नहीं.
पराये एहसासों की क्या कद्र करें,
जब अपने सपनो के लिए ही वक़्त नहीं..

तू ही बता ऐ ज़िन्दगी,
इस ज़िन्दगी का क्या होगा,
कि हर पल मरने वालों को,
जीने के लिए भी वक़्त नहीं.........

Tuesday, March 16, 2010

Five important lesions that can be learned form 3 simple pencils.

First, it tells you that everything you do will always leave 3mark.

Second, you can always correct the mistakes you make.

Third, what is important is inside you not outside

Fourth, In life you will undergo painful sharpening that will make you batter, in what you do

Lastly, to be the best you can be, you should allow yourself to be held and guided bye the hand that holds you.

IMP Quotes

1. When Snake is alive, Snake eats Ants.
When Snake is dead, Ants eat Snake.
Time can turn at any time.
Don't neglect anyone in your life........ ...

2. Never make the same mistake twice,
There are so many new ones,
Try a different one each day.

3. A good way to change someone's attitude is to change our own.
Because, the same sun melts butter, also hardens clay!
Life is as we think, so think beautifully.

4. Life is just like a sea, we are moving without end.
Nothing stays with us,
what remain is just the memories of some people who touched us as Waves.

5. Whenever you want to know how rich you are?
Never count your currency,
just try to Drop a Tear and count how many hands reach out to WIPE that- that is true richness.

6. Heart tells the eyes see less, because you see and I suffer lot.
Eyes replied, feel less because you feel and I cry a lot.

7. Never change your originality for the sake of others,
because no one can play your role better than you.
So be yourself, because whatever you are, YOU are the best.

8. Baby mosquito came back after 1st time flying.
His dad asked him "How do you feel?"
He replied "It was wonderful, everyone was clapping for me!"
Now that’s what I call Positive Attitude